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दीपावली (दिवाली)

पाँच दिनों का दीपोत्सव, जब हर घर में लक्ष्मी का स्वागत होता है

दीपावली, यानी 'दीपों की पंक्ति', पाँच दिनों का प्रकाश-पर्व है। इसकी मुख्य रात उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या होती है, जो प्रायः अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है। इस दिन घर-आँगन दीयों से जगमगाते हैं, प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है, और श्रीराम के अयोध्या लौटने, श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर-वध तथा राजा बलि की उदारता का स्मरण किया जाता है।

दीपावली (दिवाली)
RashmiGhorpade, via Wikimedia Commons, CC0 Wikimedia Commons

दीपावली कब मनाई जाती है

दीपावली अमावस्या से जुड़ा पर्व है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग में महीना पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए अमावस्या महीने के बीच आती है और यह रात 'कार्तिक अमावस्या' कहलाती है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में महीना अमावस्या पर समाप्त होता है, इसलिए वही रात 'आश्विन अमावस्या' कहलाती है। तारीख़ एक ही रहती है, केवल महीने का नाम बदल जाता है।

लक्ष्मी पूजा का दिन तय करने का मुख्य नियम यह है कि प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद का समय, अमावस्या तिथि में होना चाहिए। यदि तिथि दो संध्याओं में फैली हो, तो वह संध्या चुनी जाती है जिसके प्रदोष में अमावस्या हो। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है और कुछ वर्षों में अधिक मास जोड़कर इसका संतुलन किया जाता है, इसीलिए दीपावली अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य के बीच आगे-पीछे होती रहती है।

पाँच दिनों का पर्व

दीपावली वास्तव में पर्वों की एक माला है, और हर दिन का अपना अर्थ है।

धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी)
समुद्र-मंथन से प्रकट हुए देव-वैद्य भगवान धन्वंतरि की पूजा। नया बर्तन या थोड़ा सोना-चाँदी ख़रीदने की परंपरा है, और शाम को यमराज के लिए दक्षिण दिशा में दीपदान किया जाता है।
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली
श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति। सूर्योदय से पहले तेल-उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान की परंपरा है; दक्षिण भारत में यही भोर मुख्य दीपावली मानी जाती है।
लक्ष्मी पूजा (अमावस्या)
मुख्य रात्रि। घर और दुकानें दीयों से सजती हैं और प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। बंगाल, ओडिशा और असम में इसी रात काली पूजा होती है।
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट, बलि प्रतिपदा
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। श्रीकृष्ण के गोवर्धन धारण की स्मृति में अन्न का 'पर्वत' सजाया जाता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में राजा बलि का पूजन होता है और गुजरात में नववर्ष आरंभ होता है।
भाई दूज (यम द्वितीया)
बहनें भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं; यह यमुना द्वारा अपने भाई यम को भोजन कराने की परंपरा से जुड़ा है। महाराष्ट्र में इसे भाऊबीज और बंगाल में भाई फोंटा कहते हैं।

दीपों के पीछे की कथाएँ

दीपावली में कई पावन कथाएँ एक साथ गुँथी हैं, और अलग-अलग प्रदेश अलग कथा को सबसे निकट मानते हैं।

उत्तर भारत में यह रात सबसे बढ़कर श्रीराम की घर-वापसी की रात है: चौदह वर्ष के वनवास और रावण-वध के बाद श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटते हैं। रामायण उनकी वापसी और राज्याभिषेक का वर्णन करती है; दीप जलाने की प्रथा उसी के आसपास जनमानस ने रची।

श्रीमद्भागवत पुराण (दशम स्कंध) में श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा है, जिसने हज़ारों स्त्रियों को बंदी बना रखा था। लोक-परंपरा इस विजय को चतुर्दशी की भोर से जोड़ती है, इसीलिए दक्षिण में दीपावली की शुरुआत तड़के तेल-स्नान से होती है।

माना जाता है कि देवी लक्ष्मी समुद्र-मंथन से प्रकट हुई थीं और इस अँधेरी रात वे उन घरों में पधारती हैं जो स्वच्छ, प्रकाशित और स्वागत के लिए खुले हों। भागवत पुराण (अष्टम स्कंध) में राजा बलि की कथा भी है, जिन्हें भगवान विष्णु ने वामन रूप में विनम्र किया और पाताल भेजा; बलि प्रतिपदा इस विश्वास का उत्सव है कि वे इस दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।

दूसरी परंपराएँ भी यह रात मनाती हैं। जैन समाज इसे भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाता है, और सिख समुदाय ग्वालियर क़िले से गुरु हरगोबिंद जी की रिहाई की स्मृति में बंदी छोड़ दिवस मनाता है।

लक्ष्मी-गणेश पूजा-विधि

हर क्षेत्र और परिवार की रीति थोड़ी अलग होती है, पर संध्या की सरल पूजा प्रायः इस क्रम में होती है।

1. घर की तैयारी
घर की अच्छी तरह सफ़ाई करें, द्वार पर रंगोली बनाएँ, आम के पत्तों या गेंदे का तोरण बाँधें और संध्या के समय मुख्य द्वार खुला रखें।
2. चौकी सजाएँ
लाल कपड़े से ढकी चौकी पर लक्ष्मी जी और उनके बाईं ओर (आपकी दाईं ओर) गणेश जी को विराजित करें। आम के पत्ते और नारियल रखकर जल-भरा कलश स्थापित करें, साथ में कुछ सिक्के या नई बही रखें।
3. पवित्रीकरण और संकल्प
अपने ऊपर और पूजा-स्थल पर जल छिड़कें, घी का दीपक जलाएँ और अपना नाम, स्थान तथा पूजा का उद्देश्य बोलकर संकल्प लें।
4. पहले गणेश पूजन
गणेश जी को जल, रोली, अक्षत, फूल, दूर्वा और मिठाई अर्पित करें और पूजा निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करें।
5. लक्ष्मी पूजन
प्रतिमा पर जल छिड़कें या स्नान कराएँ, लाल वस्त्र या चुनरी, कुमकुम, कमल या लाल फूल, अक्षत, मिठाई, खील-बताशे, फल और सिक्के चढ़ाएँ। श्रीसूक्त या कोई लक्ष्मी स्तोत्र पढ़ें।
6. कुबेर और बही-खाता पूजन
व्यापारी अपनी बही पर स्वस्तिक और 'शुभ-लाभ' लिखकर पूजन करते हैं; गुजरात में इसे चोपड़ा पूजन कहते हैं।
7. दीपदान और आरती
आरती के बाद पूरे घर में, देहरी पर, जल-स्थान के पास और तुलसी के पास दीये रखें। कई घरों में एक दीपक रात भर जलता रहता है।
8. प्रसाद
प्रसाद परिवार, पड़ोसियों और घर में सेवा करने वालों के साथ बाँटें।

पूजा के मंत्र

ऋग्वेद के खिल-सूक्तों में सुरक्षित श्रीसूक्त, देवी लक्ष्मी का स्तोत्र है और दीपावली का पारंपरिक पाठ है। इसके पहले मंत्र में अग्निदेव (जातवेद) से स्वर्णिम देवी को बुलाने की प्रार्थना है। बृहदारण्यक उपनिषद (1.3.28) की प्रार्थना अक्सर दीप जलाते समय पढ़ी जाती है, क्योंकि यही इस पर्व का भीतरी अर्थ है।

  1. हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो ममा वह ॥

    hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ suvarṇarajatasrajām | candrāṃ hiraṇmayīṃ lakṣmīṃ jātavedo mamā vaha ||

    अर्थ: हे जातवेद अग्निदेव! स्वर्ण-वर्ण वाली, हिरणी-सी तेजस्विनी, सोने-चाँदी की मालाएँ धारण करने वाली, चंद्रमा-सी शीतल आभा वाली स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास ले आइए। (श्रीसूक्त, मंत्र 1)

  2. असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमय ॥

    asato mā sad gamaya, tamaso mā jyotir gamaya, mṛtyor mā'mṛtaṃ gamaya

    अर्थ: मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। (बृहदारण्यक उपनिषद 1.3.28)

प्रदेशों के अपने रंग

गुजरात में दीपावली के अगले दिन बेसतु वरस यानी नववर्ष मनाया जाता है और 'साल मुबारक' कहकर बधाई दी जाती है। महाराष्ट्र में पर्व वसु बारस (गाय-बछड़े की पूजा) से शुरू होता है और बच्चे मिट्टी के क़िले बनाते हैं। बंगाल, ओडिशा और असम में अमावस्या की रात काली पूजा होती है और पितरों के लिए दीप जलाए जाते हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में नरक चतुर्दशी की भोर तेल-स्नान, नए कपड़े और पटाख़ों से मनती है। गोवा में भोर में नरकासुर के पुतले जलाए जाते हैं। वाराणसी में पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली पर घाट जगमगा उठते हैं। नेपाल में यह पर्व तिहार कहलाता है, जिसमें भाई टीका से पहले कौवे, कुत्ते और गाय का सम्मान किया जाता है।

पकवान और रीति-रिवाज

कई दिनों तक मिठाइयाँ बनती और बँटती हैं: लड्डू, बर्फ़ी, काजू कतली, गुझिया; महाराष्ट्र में चकली और शंकरपाली, गुजरात में मठिया और चोराफली, दक्षिण में मुरुक्कु और अधिरसम। लक्ष्मी जी को खील और बताशे चढ़ाए जाते हैं। नए कपड़े पहनना, धनतेरस पर बर्तन ख़रीदना, घर में आती लक्ष्मी के छोटे पद-चिह्न बनाना, कुछ परिवारों में शिव-पार्वती के द्यूत-प्रसंग की स्मृति में ताश या चौसर खेलना, और उपहार लेकर संबंधियों से मिलना, ये सब इस पर्व के रिवाज हैं।

आजकल कई परिवार बिजली की लड़ियों की जगह मिट्टी के दीये चुनते हैं, साफ़ हवा और पशु-पक्षियों का ध्यान रखते हुए पटाख़े कम करते हैं या छोड़ देते हैं, और सफ़ाईकर्मियों व पड़ोसियों को भी मिठाई देते हैं।

आज दीपावली का अर्थ

दीपावली का सार है अँधेरे में प्रकाश का स्वागत। अमावस्या महीने की सबसे अँधेरी रात होती है, और यह पर्व उसका उत्तर बहस से नहीं, हर खिड़की पर रखे एक छोटे-से दीये से देता है। बहुत-से परिवारों के लिए यह साल का वह समय है जब पूरा घर साफ़ होता है, हिसाब चुकता होते हैं, मन-मुटाव भुलाए जाते हैं और नई शुरुआत होती है। इसकी कथाएँ भी यही कहती हैं: श्रीराम के साथ धर्म की वापसी, श्रीकृष्ण के साथ बंधन से मुक्ति, और ऐसी समृद्धि जो वहीं टिकती है जहाँ स्वच्छता, परिश्रम और उदारता हो।

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श्रद्धालुओं के प्रश्न

दिवाली कब है? दिवाली की तिथि कैसे तय होती है?

लक्ष्मी पूजा कार्तिक (पूर्णिमांत) अमावस्या को उस संध्या में होती है जब प्रदोष काल में अमावस्या तिथि हो। यह अक्टूबर या नवंबर में आती है। द्रिक पंचांग के अनुसार 2027 में नई दिल्ली के लिए यह शुक्रवार, 29 अक्टूबर है।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होता है?

सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल, जब अमावस्या तिथि चल रही हो। कई पंचांग प्रदोष के भीतर स्थिर लग्न (प्रायः वृषभ) को विशेष शुभ मानते हैं। समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें।

दिवाली पर लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?

हर पूजा में विघ्नहर्ता गणेश की पूजा पहले होती है। लक्ष्मी के साथ उनकी पूजा इस भावना को दर्शाती है कि समृद्धि बुद्धि के साथ और बिना बाधा के आए।

दिवाली के पाँच दिन कौन-से हैं?

धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा या बलि प्रतिपदा, और भाई दूज।

दिवाली श्रीराम से जुड़ी है या श्रीकृष्ण से?

दोनों से, और साथ में लक्ष्मी जी और राजा बलि से भी। उत्तर भारत विशेष रूप से श्रीराम की अयोध्या-वापसी याद करता है, जबकि दक्षिण भारत श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय का उत्सव मनाता है।

स्रोत

अंतिम शोध: 2026-10-29

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