सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्
द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा
स्क्रॉल कीजिए और सोमनाथ के सागर-तट से एलोरा की पहाड़ियों तक, स्तोत्र के क्रम में यात्रा कीजिए।

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· प्रभास पाटन · गुजरात
जहाँ चंद्रदेव को फिर से मिली अपनी आभा, सागर तट पर विराजे प्रथम ज्योतिर्लिंग।
गुजरात के सौराष्ट्र तट पर वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। सोमनाथ का अर्थ है 'चंद्रमा के स्वामी'। 1026 से लेकर अनेक बार आक्रमण झेलने और फिर-फिर बनने के बाद वर्तमान मंदिर 'कैलाश महामेरु प्रासाद' शैली में बना और 11 मई 1951 को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा हुई।
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· श्रीशैलम · आंध्र प्रदेश
जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक साथ विराजते हैं – कृष्णा तट पर नल्लमला के वनों के बीच श्रीशैल पर्वत।
आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसी परिसर में माता भ्रमरांबा विराजती हैं, जिनका स्थान महाशक्तिपीठों में गिना जाता है। तमिल शैव संतों ने भी इसकी स्तुति गाई है, इसलिए यह शैव और शाक्त, दोनों परंपराओं के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है।
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· उज्जैन · मध्य प्रदेश
शिप्रा तट पर बसी प्राचीन अवंतिका के रक्षक, दक्षिणमुखी महाकाल।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के समीप स्थित महाकालेश्वर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है और बारह ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकाल ही दक्षिणमुखी हैं। भक्तों के लिए महाकाल ही उज्जैन के राजा और अधिष्ठाता देव हैं।
पूरी कथा पढ़ें04 / 12
· मांधाता (ओंकारेश्वर) · मध्य प्रदेश
पावन नर्मदा के बीच ॐ आकार के द्वीप पर विराजे ज्योतिर्लिंग।
परंपरागत क्रम में ओंकारेश्वर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में चौथा है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा ज़िले में, इंदौर से लगभग 77 किमी दूर, नर्मदा नदी के बीच मांधाता द्वीप पर स्थित है। माना जाता है कि यह द्वीप पवित्र ॐ के आकार का है। श्रद्धालु द्वीप पर ओंकारेश्वर और नर्मदा के दक्षिणी तट पर ममलेश्वर (अमरेश्वर), दोनों के दर्शन करते हैं।
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· केदारनाथ · उत्तराखण्ड
हिमालय की गोद में बसे बाबा केदार — बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊँचा धाम।
उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग ज़िले में, मन्दाकिनी नदी के उद्गम के पास लगभग 3,580 मीटर की ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ मन्दिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इनमें सबसे ऊँचाई पर विराजमान है। यह उत्तराखण्ड के चार धाम और पंच केदार का प्रमुख तीर्थ है, जहाँ गौरीकुण्ड से लगभग 16–17 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करके पहुँचा जाता है। सर्दियों में घाटी बर्फ़ से ढक जाती है, इसलिए कपाट हर साल लगभग छह महीने ही खुलते हैं — अप्रैल के अन्त या मई से दीपावली के बाद भैया दूज तक। शेष महीनों में बाबा केदार की पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मन्दिर में होती है।
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· भीमाशंकर · महाराष्ट्र
सह्याद्रि के घने वनों में विराजे भीमाशंकर — जहाँ से भीमा नदी का उद्गम होता है।
पुणे से लगभग 110 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में, सह्याद्रि (पश्चिमी घाट) की ऊँची चोटी पर स्थित भीमाशंकर मन्दिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। भीमा नदी का उद्गम यहीं से होता है, और मन्दिर भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के भीतर सदाबहार जंगलों व धुँध से ढकी पहाड़ियों के बीच बसा है। काले पत्थर का यह मन्दिर अठारहवीं शताब्दी में मराठा संरक्षण में नए रूप में ढला, और आज श्रद्धालुओं, ट्रेकरों और प्रकृति-प्रेमियों — सबको आकर्षित करता है।
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· विश्वनाथ गली · उत्तर प्रदेश
मोक्षदायिनी काशी में बाबा विश्वनाथ — सारे जगत के नाथ।
वाराणसी का काशी विश्वनाथ मन्दिर भगवान शिव के 'विश्वनाथ' या 'विश्वेश्वर' — सारे जगत के स्वामी — रूप को समर्पित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में है। वर्तमान मन्दिर 1780 में इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया; महाराजा रणजीत सिंह के दिए सोने के कारण यह 'स्वर्ण मन्दिर' भी कहलाता है। 2021 से श्री काशी विश्वनाथ धाम ने इसे सीधे गंगा से जोड़ दिया है, और मान्यता है कि यहाँ दर्शन और गंगा-स्नान मोक्ष का मार्ग खोलते हैं।
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08 / 12
· त्र्यम्बक · महाराष्ट्र
गोदावरी के उद्गम पर विराजे त्र्यम्बकेश्वर — जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक साथ पूजे जाते हैं।
नासिक से लगभग 28 किलोमीटर दूर त्र्यम्बक नगर में स्थित त्र्यम्बकेश्वर मन्दिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में है, जहाँ से पवित्र गोदावरी नदी निकलती है। इसका ज्योतिर्लिंग अनोखा है — गर्भगृह के एक गड्ढे में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक तीन छोटे लिंग विराजमान हैं। काले पत्थर का वर्तमान मन्दिर अठारहवीं शताब्दी के मध्य में पेशवा बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) ने बनवाया। त्र्यम्बक वैदिक कर्मकाण्ड का केन्द्र और देश के चार कुम्भ-स्थलों में से एक भी है।
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· देवघर · झारखंड
जहाँ रावण का लाया शिवलिंग सदा के लिए ठहर गया, और सावन में गूँजता है 'बोल बम'।
झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे शक्तिपीठ भी माना जाता है, जहाँ माता सती का हृदय गिरा था। दुर्लभ पंचशूल से सुशोभित मुख्य मंदिर एक प्रांगण में 21 अन्य मंदिरों से घिरा है। हर सावन लाखों काँवरिए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर पैदल चलते हैं और बाबा पर जल चढ़ाते हैं।
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· नागेश्वर · गुजरात
नागों के स्वामी, जिन्होंने दारुकवन में अपने भक्त की पुकार सुनी।
द्वारका से बेट द्वारका जाने वाले मार्ग पर लगभग 16–18 किलोमीटर दूर स्थित नागेश्वर मंदिर को शिव पुराण के 'दारुकावन के नागेश' यानी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। ज़मीन से नीचे बना गर्भगृह और परिसर में शिवजी की विशाल बैठी प्रतिमा द्वारका यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। महाराष्ट्र का औंढा नागनाथ और उत्तराखंड का जागेश्वर भी यही परंपरा मानते हैं, और भक्त तीनों को पूजते हैं।
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· रामेश्वरम · तमिलनाडु
जहाँ श्रीराम ने सागर तट पर शिव की आराधना की, और सबसे दक्षिणी ज्योतिर्लिंग लहरों पर पहरा देता है।
तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे दक्षिणी है और चार धामों में से एक है। परंपरा के अनुसार श्रीराम ने रावण से युद्ध में शिव का आशीर्वाद पाने के लिए यहाँ लिंग की पूजा की थी। लगभग 15 एकड़ में फैला यह मंदिर अपने 22 पवित्र तीर्थों (कुंडों) और खंभों वाले तीसरे गलियारे के लिए प्रसिद्ध है, जो किसी भी हिंदू मंदिर के सबसे लंबे गलियारों में गिना जाता है।
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· वेरूल (एलोरा) · महाराष्ट्र
बारहवाँ ज्योतिर्लिंग, जो एक माँ की अटूट आस्था और क्षमा से प्रकट हुआ।
घृष्णेश्वर, जिसे घुश्मेश्वर भी कहते हैं, महाराष्ट्र में एलोरा की गुफाओं से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर वेरूल गाँव में भगवान शिव का मंदिर है, जिसे बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम माना जाता है। भोसले परिवार और फिर अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्मित लाल पत्थर के इस मंदिर में भक्त अपने हाथों से शिवलिंग का स्पर्श कर सकते हैं। अपने पुत्र के हत्यारे को भी क्षमा करने वाली घुश्मा की कथा इसे भक्ति और करुणा का धाम बनाती है।
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